हड्डियों की कमजोरी क्यों बढ़ रही है
आजकल हड्डियों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण खराब बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) है। जब हड्डियों में जरूरी मिनरल्स की मात्रा कम हो जाती है, तो वे कमजोर हो जाती हैं। इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। इसमें रीढ़ की हड्डी, कूल्हे और कलाई में फ्रैक्चर होने का खतरा ज्यादा रहता है।
अध्ययनों के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लोग हड्डियों की कमजोरी से प्रभावित हैं। खासकर बुजुर्गों और महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। कूल्हे या रीढ़ में फ्रैक्चर होने पर मरीज को तेज दर्द, चलने-फिरने में परेशानी और जीवन की गुणवत्ता में कमी का सामना करना पड़ता है।
रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर का खतरा
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण रीढ़ की हड्डियों में छोटे-छोटे फ्रैक्चर हो सकते हैं, जिन्हें वर्टिब्रल फ्रैक्चर कहा जाता है। इससे पीठ में तेज दर्द, झुकाव और कद कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार दवाओं और आराम से दर्द में राहत नहीं मिलती, ऐसे में आधुनिक चिकित्सा तकनीक की जरूरत पड़ती है।
क्या है बलून काइफोप्लास्टी
बलून काइफोप्लास्टी एक आधुनिक और मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है। इसका मतलब है कि इसमें बड़ा ऑपरेशन नहीं किया जाता। यह तकनीक खासतौर पर रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर के इलाज के लिए अपनाई जाती है।
इस प्रक्रिया में पीठ में बहुत छोटा सा चीरा लगाया जाता है। फिर एक छोटे गुब्बारे जैसे उपकरण को टूटी हुई वर्टिब्रा में धीरे-धीरे पहुंचाया जाता है। गुब्बारे को सावधानी से फुलाया जाता है, जिससे हड्डी अपनी सही स्थिति में आ जाती है। इसके बाद गुब्बारे को बाहर निकाल लिया जाता है और हड्डी को सहारा देने के लिए विशेष मेडिकल सामग्री डाली जाती है।
इस तकनीक के फायदे
बलून काइफोप्लास्टी से मरीज को तेज दर्द से राहत मिलती है। अधिकतर मरीजों को 24 घंटे के भीतर आराम महसूस होने लगता है। यह प्रक्रिया रीढ़ की हड्डी के आकार को सुधारने में भी मदद करती है।
चूंकि यह मिनिमली इनवेसिव है, इसलिए इसमें खून कम बहता है, संक्रमण का खतरा कम होता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। बुजुर्ग मरीजों के लिए यह तकनीक काफी सुरक्षित मानी जाती है।
प्रक्रिया कैसे की जाती है
यह प्रक्रिया लोकल या जनरल एनेस्थीसिया में की जा सकती है। मरीज की स्थिति देखकर सही विकल्प चुना जाता है। आमतौर पर इसमें लगभग एक घंटे का समय लगता है। अगर एक से ज्यादा फ्रैक्चर हों, तो समय थोड़ा बढ़ सकता है। अन्य सर्जरी की तुलना में इसमें जटिलताएं कम देखी गई हैं।
निष्कर्ष
रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ी समस्याओं के लिए बलून काइफोप्लास्टी एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प है। यह तकनीक दर्द कम करने, शरीर में लचीलापन लाने और मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक है। सही समय पर इलाज कराने से गंभीर परेशानियों से बचा जा सकता है।
किसी भी बड़े आहार, जीवनशैली या दवा से जुड़े परिवर्तन से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
वे आपकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार व्यक्तिगत सलाह प्रदान कर सकते हैं।
नोट – यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी चिंता है, तो कृपया हमें +91-9058577992 पर संपर्क करें और हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श प्राप्त करें। धन्यवाद।
