एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्या है?
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक सूजन से जुड़ी बीमारी है, जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और उसके जोड़ों को प्रभावित करती है। इसे अक्सर लोग सामान्य पीठ दर्द समझ लेते हैं, लेकिन यह धीरे-धीरे बढ़ने वाली गंभीर समस्या हो सकती है। इस बीमारी में रीढ़ के जोड़ सख्त होने लगते हैं, जिससे शरीर का झुकना, मुड़ना और सीधा खड़ा रहना मुश्किल हो सकता है।
क्यों होती है यह समस्या?
इस बीमारी में शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों पर असर डालने लगती है। इससे सूजन, दर्द और अकड़न होती है। समय के साथ जोड़ों में नुकसान हो सकता है और कुछ मामलों में हड्डियां आपस में जुड़ भी सकती हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना या कम शारीरिक गतिविधि होने से लक्षणों को पहचानना और भी मुश्किल हो जाता है।
किन लोगों में ज्यादा देखी जाती है?
यह बीमारी आमतौर पर युवा उम्र में शुरू होती है, जब व्यक्ति सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इसके मामले ज्यादा देखे जाते हैं। अगर समय पर इलाज न हो, तो यह काम करने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित कर सकती है।
इसके सामान्य लक्षण क्या हैं?
- पीठ के निचले हिस्से या नितंबों में लगातार दर्द
- सुबह उठते समय ज्यादा अकड़न और दर्द
- आराम करने से दर्द बढ़ना और हल्की गतिविधि से कुछ राहत मिलना
- रात में दर्द के कारण नींद का टूटना
- आंखों में लालिमा, दर्द या रोशनी से परेशानी
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इलाज के विकल्प
आजकल एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस को नियंत्रित करने के लिए उन्नत दवाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें बायोलॉजिक्स कहा जाता है। ये दवाएं शरीर में सूजन पैदा करने वाले तत्वों पर सीधे असर करती हैं। इससे दर्द, अकड़न और सूजन में कमी आती है। साथ ही आंखों की सूजन, हृदय से जुड़ी समस्याओं और मानसिक तनाव के जोखिम को भी कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, सही बैठने का तरीका और स्वस्थ जीवनशैली भी इलाज का अहम हिस्सा हैं।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
अगर पीठ दर्द धीरे-धीरे बढ़ रहा है, सुबह ज्यादा महसूस होता है या कई हफ्तों तक ठीक नहीं हो रहा, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। आंखों से जुड़े लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। जल्दी पहचान और इलाज से जोड़ों को ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है।
निष्कर्ष
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस को साधारण पीठ दर्द समझकर टालना नुकसानदेह हो सकता है। सही समय पर जांच, उचित इलाज और जीवनशैली में सुधार से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। जागरूकता और सतर्कता से व्यक्ति सक्रिय और संतुलित जीवन जी सकता है।
किसी भी बड़े आहार, जीवनशैली या दवा से जुड़े परिवर्तन से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
वे आपकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार व्यक्तिगत सलाह प्रदान कर सकते हैं।
नोट – यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी चिंता है, तो कृपया हमें +91-9058577992 पर संपर्क करें और हमारे अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श प्राप्त करें। धन्यवाद।
